30 अप्रैल, 2014

चंद हाइकू





(१)
एक भावना 
प्यार जताने की है 
विकार हीन |
(२)
जलती चिता 
मुक्ति है संसार से 
हुई विरक्ति |
(३)
अंतिम सांस 
अब साथ छोडती 
न गयी तृष्णा |
(४)
ना यह दिल
 है मेरा आशियाना 
हूँ यायावर |
(5)
रात कटे ना
चंद सपने साथ
मेरी सौगात
(६)
रात कटे ना
जागती विरहणी
कोइ जाने ना |
(७)
चंचल मन
बहकते कदम
कहाँ जाएगा |

10 टिप्‍पणियां:

  1. -सुंदर रचना...
    आपने लिखा....
    मैंने भी पढ़ा...
    हमारा प्रयास हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना...
    दिनांक 01/05/ 2014 की
    नयी पुरानी हलचल [हिंदी ब्लौग का एकमंच] पर कुछ पंखतियों के साथ लिंक की जा रही है...
    आप भी आना...औरों को बतलाना...हलचल में और भी बहुत कुछ है...
    हलचल में सभी का स्वागत है...

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 01-05-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

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  3. जीवन के विविध रंग समेटे बहुत सुंदर हाईकू !

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  4. bahut achha chitran kiya hai alag alag haiku mein

    shubhkamnayen

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  5. टिप्पणी हेतु धन्यवाद |

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