06 मई, 2014

ए इंद्र धनुष

https://lh4.googleusercontent.com/szE19IBD1kFVw-2FSb4YlB0uKxQZwwlfB8fG_WeidYs=s195-p-no

14 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (07-05-2014) को "फ़ुर्सत में कहां हूं मैं" (चर्चा मंच-1605) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह ! विरल दृष्टि ! अति सुंदर !

    जवाब देंहटाएं
  3. वर्चस्व की लडाई , प्रकृति का तो सिद्धांत ही यही रहा !
    सुन्दर !

    जवाब देंहटाएं
  4. प्रकृति में भी बर्चस्य की लड़ाई है ......नजर चाहिए देखने के लिए ...बहुत सुन्दर !
    New post ऐ जिंदगी !

    जवाब देंहटाएं
  5. ..... क्‍या बात है बहुत सही कहा आपने

    जवाब देंहटाएं
  6. -सुंदर रचना...
    आपने लिखा....
    मैंने भी पढ़ा...
    हमारा प्रयास हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना...
    दिनांक 08/05/ 2014 की
    नयी पुरानी हलचल [हिंदी ब्लौग का एकमंच] पर कुछ पंखतियों के साथ लिंक की जा रही है...
    आप भी आना...औरों को बतलाना...हलचल में और भी बहुत कुछ है...
    हलचल में सभी का स्वागत है...

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: