20 अगस्त, 2019

शिला









पति कोप से हुई  श्रापित
शिला हुई  गौतम नारी बेचारी
युग बीता अहिल्या बनी साक्षी
 उस काल की घटनाओं की
कितनी ऋतुएँ आई गईं
शिला पर परत गर्त की चढ़ती गई
इस रूप में जीते जीते वह हारी
 तब निदान   जानना चाहा
तभी ऋषी ने उपाय बताया
त्रेतायुग में जब श्री राम के
चरण रज शिला पर पड़ेगे 
तभी उसे श्राप से मुक्ति मिलेगी
और समय बीता
 वह उस  काल की साक्षी हुई   
राम नाम के जाप से
 वह राम में खो गई
हार नहीं मानी उसने
 पथरा  गईं आँखें  बाट जोहते  
जैसे ही  प्रभु राम के
 चरण पड़े शिला पर
माथे पर चरण रज लगी
अहिल्या श्राप  मुक्त हो गई
 फिर से सजीव  नारी हो गई |
आशा

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (21-08-2019) को "जानवर जैसा बनाती है सुरा" (चर्चा अंक- 3434) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सुप्रभात
    मेरी रचना की सूचना हेतु आभार सर |

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  3. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    २६ अगस्त २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  4. वाह ।बहुत खूब ।
    एक बेकसूर नारी को
    शिला के श्राप से मुक्ति मिली।

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  5. बहुत बढ़िया ! सुन्दर प्रस्तुति

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  6. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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