13 नवंबर, 2019

आहट तेरे आने की



द्वार पर तेरी  आहट को
 पहचानती हूँ मै
तुझे अपना मान
मेने भूल नहीं की है |
खोई रहती हूँ
 तेरी यादों  की दुनिया में
तुझे पा कर  मैंने
 कोई  गलती नहीं की है|
है नन्हीं सी जान  
 अदाओं  की  टोकरी  
तेरे हर कदम की आहट
पहचानती हूँ मैं |
पल भर दूर रह नहीं सकती
तेरी निगाहों का  आकर्षण
 है ही  ऐसा कि उनमें
 खोए रहने को रहती हूँ  बेकल |
हर हरकत  तेरी
पहचान गई  हूँ मैं
तेरी  चंचल  अदाओं पर न्योछावर
 तुझे ठीक से जान गई हूँ मैं | 

आशा

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14.11.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3519 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की गरिमा बढ़ाएगी ।

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

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  2. सुप्रभात
    सूचना हेतु आभार सर |

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  3. वाह ! वात्सल्य भाव से सिक्त मनमोहक रचना !

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 18 नवंबर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. गहरे मातृत्व प्रेम को अभिव्यक्त करती रचना।
    कोमल अहसास

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  6. धन्यवाद सुजाता जी टिप्पणी के लिए |

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