19 अप्रैल, 2020

चाहे किसी का बलिदान रहा हो

 
 चाहे  किसी का भी बलिदान रहा हो
अब तो  आजाद देश  हमारा है 
हम हैं स्वतंत्र देश के नागरिक
जिसकी हमें रक्षा करनी है |
बीते कल को क्यूँ याद करें
जो बीत गया बापिस नहीं आने वाला
देश को संकट से मुक्त कराना है
प्राकृतिक आपदा से बचाना है
नियमों का गंभीरता से पालन कर
देश की   हमें रक्षा करनी है |
है बहुत बड़ी जिम्मेदारी कंधे पर 
जिसका निर्वाह हमें करना है 
यह आपदा है या महामारी है
इसका कोई इलाज नहीं 
पूरे विश्व में फैली है |
नियमों का सख्ती से पालन करना
एक यही विकल्प है हमारे पास
उसी को निभाए जाएंगे
यही संकल्प हमारा है |
आशा

8 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. सुप्रभात
      धन्यवाद शास्त्री जी टिप्पणी के लिए |

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 19 एप्रिल 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. सही बात ! नियमों का पालन करेंगे तभी स्वयं को और अपने देश को इस महामारी से बचा पायेंगे ! सार्थक चिंतन !

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    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद साधना |

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  4. और तो ठीक है आशा जी,पर अतीत का भान रखे बिना
    भविष्य का पूरा ध्यान भी तो नहीं रखा जा सकेगा .

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      आपने सही कहा है पर मैं सोचती हूँ बीती बातें ही करते रहे यदि ,नया कब सोचेंगे |धन्यवाद टिप्पणी के लिए |

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