23 मई, 2020

क्षणिका




१-किसने कहा तुमसे
प्यार तुम्हारे नसीब में नहीं है
है मुझे पता  है वह बेशुमार
तुम्हें उसकी कोई  कद्र नहीं |

२-प्यार किया नहीं जाता
अनजाने में हो जाता है
पात्र हो या कुपात्र मन जिस पर आए
आज के युग में  सब चलता है |

३- यह है भाग्य का खेल
किसी से क्या कहना
हार जीत का सिलसिला
ऐसे ही चलता है |

४-जन्म मरण एक साथ
जब सुनने को मिलते हैं
मन में विरक्ति जाग्रत होती है
मन संसार से उचटता है |

५- कितनी अनहोनी घटनाएं
होती हैं आए दिन
ईश्वर परीक्षा लेता है
मनुष्य के धैर्य का  |

आशा

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 24 मई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. जीना इसीका नाम है ! सुन्दर उद्गा्र !

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  4. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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