01 अगस्त, 2020

आया राखी का त्यौहार

                                 आया राखी का त्योंहार
  ना तो गहमा गहमी बाजार में
 ना ही कोई उत्साह
 आम जन मानस में |
हर ओर  कोरोना
 महामारी का भय व्याप्त
मार्ग सभी अवरुद्ध हुए है
 किससे  जाना हो संभव |
बहन ने मना कर दिया
 आना है असम्भव इस बार  
मन को झटका लगा
 कैसे मानाएं यह त्यौहार
भाई बहन के समागम के  बिना |
 अजीब सा खालीपन लगेगा
घर में घेवर बना लेंगे 
मीठी खीर बनालेंगे |
 मन को समझाया 
यह साल निकल जाने दो
अभी है बिपदा भारी
 घर में ही राखी मना लेंगे |
 अगले बर्ष  का इंतज़ार रहेगा
 तभी अरमां पूर्ण करेंगे
 यह है कठिन समस्या
 इससे क्या घबराना |
 हर वर्ष यही त्योंहार होगा
 हम होंगे  भाई रहेंगे
पहली राखी भेट चढ़ेगी प्रभू को 
इसबार वंचित रह् जाएगा भाई |
पर इससे ही संतोष करेंगे
 घर में रह कर
 मन को समझालेंगे 
बच्चों को बहला लेंगे |
अन्य विकल्प नहीं  है कोई
 मन को शांत रखने का
पर समय की मांग है यह
 इससे पीछे नहीं हटेंगे |
आशा
  

6 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद ओंकार जी |

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (02-08-2020) को     "मन्दिर का निर्माण"    (चर्चा अंक-3781)    पर भी होगी। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      सूचना हेतु आभार शास्त्री जी |

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  3. इस कोरोना ने सबके त्यौहार फीके कर दिए और उत्साह पर पानी फेर दिया ! लेकिन सब्र करने के अलावा और कोई चारा भी तो नहीं ! सबकी सुरक्षा के लिए इस बार दूर से ही शुभकामनाएं और आशीर्वाद देकर त्यौहार मना लिया जाए वही उचित होगा ! सुन्दर सामयिक रचना !

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद साधना |

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