26 सितंबर, 2020

मेरी बेटी



मेरी बेटी मन मोहनी

बहुत प्यारी  सबकी  दुलारी

मुझे बहुत भाग्य से मिली है

उस जैसा कोई गुणी नहीं है |

है हर कार्य में निपुण

पढ़ने में सबसे आगे

कोई कार्य नहीं छूटा उससे

सब में है सबसे आगे |

हूँ बहुत भाग्यशाली

मुझे उस जैसी बेटी मिली है

मैंने  जाने किस जन्म में

 कोई पुन्य किये थे जो उसे पाया |

लोग तो जलते हैंमेरा भाग्य  देख कर

उस गुणों की टोकरी को

चाहते हैं वह उमके घर की रौनक बने

उनके घर को रौशन करे |

आज बेटी दिवस मना रहे हैं  

दुआ कर रहे हैं काश ऐसी  बेटी मिले

 हो  ऐसी गुण सम्पन जो

 दोनो कुलों का  नाम रौशन  करे |

                                                   आशा   

 

 

 

16 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद स्मिता |

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    2. धन्यवाद ओंकार जी टिप्पणी के लिए |

      हटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 27 सितम्बर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (27-09-2020) को    "स्वच्छ भारत! समृद्ध भारत!!"    (चर्चा अंक-3837)    पर भी होगी। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

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  4. वाह!!!
    बेटी सचमुच होती ही ऐसी हैं।

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  5. बेरी पर बहुत सुंदर रचना!-साधुवाद! -मैंने आपका ब्लॉग अपने रीडिंग लिस्ट में डाल दिया है। कृपया मेरे ब्लॉग "marmagyanet.blogspot.com" अवश्य विजिट करें और अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत कराएं।
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    सादर!--ब्रजेन्द्र नाथ

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    उत्तर
    1. धन्यवाद मर्मग्य जी ब्लॉग पर आने के लिए |

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  6. सारे जग में एक बेटी ही होती है जो कहीं गहराई से रोपी नहीं जाती लेकिन फिर भी दोनों घरों के आँगन में ताउम्र फूल बिखेरती है और वहाँ की फिजाओं को महका कर रखती है !

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  7. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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