26 नवंबर, 2020

सूर्य


 


सात अश्वों पर हो कर सवार

चलदिया सूर्य देशाटन को

एक ही राह पर चला

मार्ग से बिचलित न हुआ |

यही है विशेषता उसकी

जिसने भी अनुकरण किया

जीवन सफल हुआ उसका

 इसी  मन्त्र ने  सफलता का दामन छुआ  |

अपनी  ऊष्मा से सभी में जान भरी

कितनों को जीवन दान दिया

तुम्हारी रश्मियों की छुअन ने 

पुष्पों को नव जीवन दिया |

आशा


11 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 27-11-2020) को "लहरों के साथ रहे कोई ।" (चर्चा अंक- 3898) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    "मीना भारद्वाज"

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  2. वाह ! सार्थक सृजन ! सुन्दर रचना ! सूर्य है तो संसार है वरना जीवन की कल्पना ही निर्मूल थी !

    जवाब देंहटाएं

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