28 नवंबर, 2020

नीला फूल



आँगन में एक फूल खिला जो  

जंगल से अस्वीकारा गया  

है रंग रूप इतना सजीला  

मन को मोह रह |

 रंग नीला है  उसका  आसमान सा

प्याले सा  दिखाई देता है

लगता है चाय छान लूं उसमें

अधरों से लगालूँ उसको |

जब मिठास मस्तिष्क में घुल जाए

 मन  से सहेजूँ उसे

बरसों बरस याद रखूँ मिठास को 

भुला नहीं पाऊं |

आशा

 

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (29-11-2020) को  "असम्भव कुछ भी नहीं"  (चर्चा अंक-3900)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 29 नवंबर नवंबर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार सर |

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  3. उत्तर
    1. सुप्रभात
      धन्यवाद टिप्पणी के लिए ओंकार जी |

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  4. सुप्रभात
    टिप्पणी हेतु आभार सहित धन्यवाद ओंकार जी |

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  5. हृदयग्राही ख़ूबसूरत कविता

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    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद डा वर्षा जी |

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  6. सुप्रभात
    धन्यवाद टिप्पणी के लिए शांतनु जी |

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  7. भई तस्वीर तो गुलाब की है जो हर जगह बहुतायत से मिलता है ! रंग भी आसमानी नीला नहीं मेजेंटा गहरा गुलाबी है ! उस फूल को अवश्य देखना चाहूँँगी जिसका ज़िक्र कविता में है ! वैसे रचना खूबसूरत है !

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    1. अब आप देखना फूल भी नीला है और सही तस्वीर डाल दी है |

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