17 जनवरी, 2021

यात्रा विवरण -१(वैष्णो देवी )

बहुत दिनों से सोच रहे थे कोई नवीन जगह देखें |सोचा क्यूँ न जन्नत की सैर की जाए|पहले वैष्णो देवी जाने का प्रोग्राम बनाया |टिकट की रिजर्वेशन करवा ली |ज्यादा भीड़ नहीं थी आसानी से टिकट मिल गया |

साथ में बड़ी बेटी और बच्चे थे इस कारण  जाने में बहुत सुविधा रही

पर कटरा पहुँचते शाम हो गई थी |थकान बहुत हो गई थी इसलिए रात में होटल में रुके |दूसरे दिन सुबह पांच बजे देवी दर्शन को जाना था | सुबह की बस पकड़ी और लगभग दो घंटे बाद हम अपने गंतव्य स्थल पर पहुँच गए |पर बेटी के  बड़े बेटे को बुखार आ गया |इसकारण उन लोगों ने दर्शन का इरादा टाल दिया |वैसे भी वे लोग पहले जा चुके थे |दूसरे दिन प्रातः हम लोग दर्शन को निकले |पहले सोच रहे थे कि पैदल ही जाएंगे पर थोड़ी दूर चल कर ही थकान होने लगी |हमने घोड़े पर जाने का मन बनाया |और घुड़सवारी  का आनंद लिया भरपूर |लगभग दो घंटे बाद एक प्रांगण में जा पहुंचे |देखा बहुत लम्बी कतार लगी थी दर्शनार्थियों की |हम भी कतार में शामिल हो गए |धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे |करीब एक घंटा लगा देवी के दर्शन में |पर जब वहां पहुंचे आधे मिनिट भी रुकने न दिया जिससे दर्शन ठीक से कर पाते |आगे बढ़ो आगे बढ़ो कहते स्वयंसेवकों ने तो ध्यान  से दर्शन ही नहीं करने दिए |बड़े बेमन से आगे बढे | बहुत जल्दी ही हम फिर से उसी

आँगन में खड़े थे |वहां की खिड़की से प्रसाद लिया और लौट चले |

भैरो मंदिर बहुत ऊंचाई पर था |वहां जाने का इरादा कैंसिल कर दिया |फिर से घोड़ों पर हुए सवार और नीचे उतर आए |नीचे गुलशन कुमार का स्टाल था उससे कुछ कसेट खरीदे |लौटते समय बाजार से छिले अखरोट खरीदे | और बापिस होटल में आगये  |

आशा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  

4 टिप्‍पणियां:

  1. वैष्णो देवी के दर्शन आसान नहीं ! यात्रा कठिन है ! आपका अनुभव हमारा भी रहा ! जब दर्शन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता तो बड़ा असंतोष होता है ! वैसे रास्ता बहुत सुन्दर है !

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  2. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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