02 फ़रवरी, 2021

हार जीत में अंतर क्या है

 


 मझे तुमसे बहुत कुछ

सीखने को मिला है

यूँ तो सीखने की

 कोई सीमा नहीं है

पर संतुष्टि नहीं होती

जब तक परीपूर्णता न होती  |

यही पूर्णता आते आते

जीवन बहुत व्यय हो जाता है

है जीवन बहुत छोटा सा 

कब समाप्त हो जाए

 जान नहीं पाती|

सच क्या और झूठ क्या

अंतर नहीं कर पाती

बस यहीं आकर मात खा जाती

तुमने सही सलाह दी थी

   जिसे मैंने अपनी गिरह में बांधा है 

किसी कार्य के पूर्ण होने तक

पीछे कदम नहीं हटाना

 यही है  राम बाण मन्त्र मेरे लिए

जिसका अनुसरण किया है |

तुमसे यह पाकर 

कैसे उऋण हो पाऊंगी 

बस इतना और बतादो 

जीवन में कभी हार का मुंह न देखूं 

यही दुआ दो | 

आशा 

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (03-02-2021) को  "ज़िन्दगी भर का कष्ट दे गया वर्ष 2021"  (चर्चा अंक-3966)
     
     पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  2. बहुत ही सुन्दर सार्थक सृजन ! बढ़िया रचना !

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