11 फ़रवरी, 2021

फूलों के रक्षक


 जब मिलना चाहो फूलों से

काँटों पर से गुजरना होगा 

काँटे है संरक्षक उनके

पहले उनसे निवटना होगा |

शूल की चुभन सहना सरल नहीं है

वह ह्रदय की व्यथा बढा देते हैं

पर उनपर से गुजरने की

 असलियत समझा देते हैं |

उनके सानिध्य में आने से क्यूँ डरते हो

फूलों तक पहुँचने के लिए

उनसे मित्रता तो करनी ही  होगी

नहीं तो यह प्रेम कहानी

अधूरी ही रह जाएगी |

आशा

 

12 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 12-02-2021) को
    "प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है" (चर्चा अंक- 3975)
    पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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  2. प्रणाम आशा जी, क्या खूब ल‍िखा है... फूलों तक पहुँचने के लिए

    उनसे मित्रता तो करनी ही होगी.. वाह

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  3. वाह ! फूलों पर काँटों के पहरे होना लाजिमी है ! काँटों के संरक्षण में ही फूल खिल पाते हैं वरना तो खिलने से पहले ही मसल दिए जाते ! सुन्दर रचना !

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद साधना |

      हटाएं

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