25 फ़रवरी, 2021

स्वप्नों का इतिहास



 स्वप्नों का इतिहास सजीला

कहाँ कहाँ नहीं पढ़ा मैंने

इतिहास तो इतिहास है

मैंने भूगोल में  भी पढ़ा है|

प्रतिदिन जब सो कर उठती हूँ

अजब सी खुमारी रहती है

कभी मस्तिष्क रिक्त नहीं रहता

 उथल पुथल तो रहती ही है |

यदि एक स्वप्न ही 

रोज रोज आने लगे

  कहीं कोई अनर्थ न हो जाए

शुभ अशुभ के चक्र में फंसती जाती हूँ |

कई  पुस्तकें टटोलती हूँ

कहीं कोई हल मिल जाए

पर कभी कभी ही

यह  सपना सच्चा होता है |
महत्व बहुत दर्शाता है

 स्वप्नों का आना जाना

हर स्वप्न कुछ कह जाता है

ऐसा इतिहास बताता है |

 बड़े युद्ध हुए है इन के कारण

खोजे गए शगुन

अपशगुन के कारण |

पर  यह भी  कहा जाता

मन में हों जैसे विचार

 वैसे ही सपने आते  

वही इतिहास की पुस्तकों में

सजोकर रख दिए जाते हैं |

आशा 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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15 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद आलोक जी |

      हटाएं
  2. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 26-02-2021) को
    "कली कुसुम की बांध कलंगी रंग कसुमल भर लाई है" (चर्चा अंक- 3989)
    पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      मेरी पोस्ट की सूचना के लिए आभार मीना जी |

      \

      हटाएं
  3. सुप्रभात
    टिप्पणी के लिए धन्यवाद शास्त्री जी

    जवाब देंहटाएं
  4. मन में हों जैसे विचार
    वैसे ही सपने आते
    सही कहा दीदी। कई बार तो बड़े अजीब सपने भी आते हैं।

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  5. बहुत सही अभिव्यक्ति है आपकी आशा जी । जैसे विचार हों, वैसे ही स्वप्न आया करते हैं ।

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  6. बढ़िया रचना ! सच है जो विचार मन में दिन भर उथल पुथल मचाते हैं स्वप्न में भी वही आते हैं !

    जवाब देंहटाएं

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