18 मार्च, 2021

चाह तुम्हारी



                                              चाह तुम्हारी 

हुई पूर्ण फिर भी

क्यूँ खुशी नहीं

मुख मंडल पर

मुझे बताओ

मन में  विचार क्या

पलने लगा

होता यदि  मालूम  

शायद जानू

मैं तुम्हें पहचानू

मदद करो

किसी काबिल बनू

जीतूँ   विश्वास

गोरे   सुर्ख  गालों की

मुस्कान  पर

लगी मेरी  मोहर

किसी और से

मैं कैसे उसे बाटूं

आशा

 

16 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है ! प्यारी आहना की प्यारी सी तस्वीर और बहुत ही सुन्दर रचना ! सुन्दर सृजन
    !

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  2. सुप्रभात
    मेरी रचना की सूचना के लिए आभार मीना जी |

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  3. सुप्रभात
    टिप्पणी के लिए धन्यवाद साधना |

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  4. बेहतरीन रचना बहुत ही सुंदर भाव

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  5. बेहद प्यारी रचना,सादर नमन आपको दी

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