18 अप्रैल, 2021

दुष्टानंद


 

होती आवश्यकता जब

 कोई साथ नहीं देता

यदि कोई कार्य सफल हो जाए

 कभी प्रशंसा  नहीं करता |

 इसी कोशिश में रहता

कहीं तो कमीं दीख जाए

जब कोई कमी दिखाई देती

दिल खोल उसे उजागर करता |

किसी भी काम की कमीं

निकाल  उजागर करने में

जो दुश्टानंद उसे मिलता

वही उसका उस दिन का

सकारात्मक कार्य होता |

कभी उसने सोचा नहीं

यदि ऐसी ही घटना

उसके साथ होती तब भी क्या

ऎसी ही प्रतिक्रया उसकी होती |

आशा 

15 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. सुप्रभात
      आलोक जी टिपपानी के लिए धन्यवाद |

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  2. उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए आभार सहित धन्यवाद ओंकार जी

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  3. उत्तर
    1. सुप्रभात
      अमित जी आपने मुझे अच्छा अवसर दिया है |अपनी इस पत्रिका का नाम व् पता भेजिएगा |टिप्पणी के लिए आभार सहित धन्यवाद |

      हटाएं
  4. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार ( 19-04 -2021 ) को 'वक़्त का कैनवास देखो कौन किसे ढकेल रहा है' (चर्चा अंक 4041) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आपका बहुत बहुत आभार |

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  5. जी हां, ऐसे लोग हमें अपने आसपास ही मिल जाते हैं। उन्हें तो समय ही सुधार सकता है। हमें बस इतना ध्यान रखना है कि जाने-अनजाने कहीं हम भी ऐसे ही न बन जाएं।

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  6. सुप्रभात
    आपकी टिप्पणी बहुत सटीक लगी |टिप्पणी के लिए धन्यवाद जितेन्द्र जी |

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  7. धन्यवाद आपका टिप्पणीकरने के लियेए tippअनी



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  8. निंदक नियरे राखिये ! ऐसे लोग भी जाने अनजाने ही सही लेकिन परोक्ष रूप से दूसरों का भला ही कर जाते हैं ! सुन्दर रचना !

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