24 अप्रैल, 2021

हाइकु (कोविद )


 

१-जीवन शुष्क

ना कोई आकर्षण

बदरंग है

२-कष्टों की बेल  

आसपास पसरी

स्वप्न अधूरा  

३-महांमारी का

जब  आगाज हुआ  

सदमा लगा

४-विकट रूप  

कोविद की बापसी

रूप बदला

५- दुगुनी शक्ति

समाई है  इस में

जान न बक्शी

६- कोई भी कष्ट  

सहा जा सकता है

कोविद नहीं  


आशा 

 

8 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 25-04-2021) को
    "धुआँ धुआँ सा आसमाँ क्यूँ है" (चर्चा अंक- 4047)
    पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार सहित धन्यवाद |

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    2. कृपया शुक्रवार के स्थान पर रविवार पढ़े । धन्यवाद.

      हटाएं

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