23 मई, 2021

जब समुद्र मंथन हुआ


जब हुआ समुद्र मंथन
महादेव ने
हलाहल पान किया
दी जगह विष को
अपने कंठ में |
निकले चौदह रत्न
और बहुत कुछ
अमृत से भरा
घट भी निकला
दानवों ने जिसे
झपटना चाहा |
मोहिनी एकादशी को
विष्णु ने
रूप धरा मोहिनी
घट अमृत को
छीना दानवों से
सब देवों को
अमृत पान कराया |
दानवों से
उन्हें बचाया
देवों को अजर
अमर बनाया |
आशा
सीमा वर्णिका and 4 others
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8 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बहुत ही शानदार पोस्ट लिखी है. इस पोस्ट के लिए Ankit Badigar की तरफ से धन्यवाद.

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  2. सुप्रभात
    धन्यवाद अंकित जी टिप्पणी के लिए |

    जवाब देंहटाएं
  3. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा रविवार (23-05-2021 ) को 'यह बेमौसम बारिश भली लग रही है जलते मौसम में' (चर्चा अंक 4074) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार रवीन्द्र जी |

      हटाएं
  4. सुप्रभात
    धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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