06 मई, 2021

सच्ची भक्ति



नृत्य संगीत से सजा है जीवन गीत

कभी कहीं तो गीत गाता ही है

जिसमें रुझान नहीं संगीत के प्रति

उसका जीवन  है रूखा नीरस सा |

नृत्य से आत्मसंतुष्टि मिलाती है

 नियमित हो जाता है व्यायाम

तन मन  में  आजाती है स्फूर्ति

मन महक उठता है फूलों की सुगंध सा  |

भजनामृत में हो  मगन भक्ति भाव में डूबते

नजदीक होते प्रभू के सच्चे दिल से ध्यान करते  

प्रभु को भी रहता ध्यान  ऐसे ही भक्तों का

जो दिल से सुमिरन करते हर समय बैठते उठते |

 भक्ति में जो सुख मिलता है चौसठ मिष्ठानों से  नहीं

सच्चे मन से की सेवा से अच्छा  कोई कार्य नहीं

भूखे को भोजन देना वस्त्र दान करने से बहुत पुन्य  मिलता है

 गौ धन की सेवा करने से बड़ा कोई पुन्य कार्य नहीं है |

सच्चा भक्त है जो दिल से करे  वे कार्य

जिन से परहित की भावना जुडी हो

निस्वार्थ भाव से किये कार्य मन को सुकून देते हैं

वे सब भगवान के बहुत नजदीक होते हैं |

आशा  

14 टिप्‍पणियां:

  1. जी बहुत बढ़िया। एक सार्थक रचना।

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    1. सुप्रभात
      प्रकाश जी धन्यवाद टिप्पणी के लिए |

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  2. बहुत सुंदर। बिल्कुल सही लिखा हैं आपने।

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    1. सुप्रभात
      बहुत धन्यवाद टिप्पणी के लिए |

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  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०८-०५ -२०२१) को 'एक शाम अकेली-सी'(चर्चा अंक-४०५९) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      आभार मेरी रचना को शामिल करने के लिए अनीता जी |

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  4. सुन्दर सृजन ! सार्थक अभिव्यक्ति !

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  5. बहुत अच्छा संदेश दिया है आदरणीया दीदी। अनमोल वचन।

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  6. धन्यवाद आपका बहुत

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