18 मई, 2021

काश कुछ ऐसा हो जाए

                      काश कुछ ऐसा हो जाए

रात में अपार शान्ति रहे

चाहे दिन में व्यस्त  रहूँ

पर रात्री को विश्राम करूं |  

आज की इस दुनिया में

है इतनी व्यस्तता कि

दिन दिन नहीं दीखता

रात का  पता नहीं होता |

सदा  दिमाग अशांत  रहता

यह तक सोच नहीं पाता

क्या सही है  क्या गलत है

 मनन के लिए भी समय नहीं होता |

भेड़ चाल चल रहा आदमीं आज

नतीजा क्या होगा कभी विचारा नहीं

मन हवा के वेग सा उड़ चला

 साथ पा अन्य साथियों  का |  

शायद यही है अंध भक्ति आज की

नेत्र बंद कर अनुसरण करने की प्रथा

खुद के विचारों से है  तालमेल कहाँ

फिर भी एक बार तो सोचा होता |

क्या खुद का कोई अस्तित्व नहीं

या सोचने की क्षमता नहीं है

 रेत के कण का भी होता है महत्व

 फिर स्वयम का क्यों नहीं |

आशा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

31 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 19 मई 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सुप्रभात
      मेरी रचना की सूचना के लिए आभार दिव्या जी |

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  2. रेत के कण का भी होता है महत्व

    फिर स्वयम का क्यों नहीं |---गहरी रचना, गहरे भाव।

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    उत्तर
    1. सुप्रभात
      धन्यवाद संदीप जी टिप्पणी के लिए |

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  3. उत्तर
    1. सुप्रभात
      टिप्पणी के लिए आभार सहित धन्यवाद ओंकार जी |

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  4. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा मंगलवार (18-05-2021 ) को 'कुदरत का कानून अटल है' (चर्चा अंक 4069) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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  5. सुप्रभात
    मेरी रचना को स्थान देने की सूचना के लिए आभार सहित धन्यवाद रविन्द्र जी |

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  6. बहुत सुन्दर रचना मैम
    कृपया मेरे ब्लॉग को भी पढ़े

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  7. स्वयं को खोज कर ही उसका महत्व जाना जा सकता है

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  8. काश कुछ ऐसा हो जाए
    रात में अपार शान्ति रहे

    चाहे दिन में व्यस्त रहूँ

    पर रात्री को विश्राम करूं |

    आमीन !!!
    आपकी प्रार्थना फलीभूत हो...
    सुंदर रचना 🙏

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  9. वाह!सुंदर भावों से सजी रचना ।

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  10. आदरणीया मैम, अत्यंत सुंदर रचना । आज मनुष्य की व्यस्तता चूहे की दौड़ जैसी हो गई है । इंसान बस भागा जा रहा है बस बिना किसी सोच -विचार या उद्देश्य के । हर काम के लिए समय है उसके पास लेकिन अपने लिए और अपनों के लिए समय नहीं । हृदय से अत्यंत आभार इस सुंदर रचना के लिए व आपको प्रणाम ।

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  11. सच में लोग आज इतने व्यस्त हो गयें है कि ना तो खुद पर ध्यान दें रहें हैं और ना ही दूसरे पर किसी को उनके साथ की जरूरत है उनके अपनेपन के प्यार भरे एहसास की बस बिना किसी की प्रवाह किएँ चले जा रहे हैं
    उम्दा रचना मैम

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  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  13. वाह ! गहन भाव लिए अत्यंत सुन्दर अभिव्यक्ति ! उत्कृष्ट सृजन !

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