24 मई, 2021

छाई गरीबी

 

 




छाई   गरीबी

कैसे सही जाएगी

 होगा अब क्या 

कितना सोचा जाए

केवल सोच

कुछ कर न पाए

उठाने होंगे 

 आवश्यक कदम

सचमुच में  

यदि एक  भवन  हो

सर छिपाने   

रोटी खाने  के लिए

 सोच ही नहीं

कल्पना सतही हो

क्या लाभ होगा

कुछ भी नहीं  

वर्तमान में इनका

कुछ न  लाभ  

रोजी  है आवश्यक

हुए सक्रीय  

कुछ तो राहत हो  

 मीठा हो फल    

दूर हो दुःख दर्द 

न हो अधीर 

हो मन को  सुकून |

आशा 


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