16 जून, 2021

स्वर्ग और नर्कहैं यहीं

 

  


स्वर्ग और नर्क

 दौनों ही

 दिखाई दे जाते

इसी कायनात में|

जब अपने किये

कार्यों का आकलन

 अंतर आत्मा की आवाज सुन  

 किया जाता | 

खुद अपना आकलन

 निष्प्रह हो कर

 किसी ने किया यदि

शीशे में दीखती खुद की छवि 

जैसा दिखाई देता आकलन  |

पर है आवश्यक

तटस्थ भाव से

 हो निर्णय निष्पक्ष

 किये  गए  आकलन पर |

 खोजा जा सकता है

इसी दुनिया में

स्वर्ग और नर्क

अपने आसपास यहीं  |

हर किये गए

 कर्म का फल

यहीं मिलता है

है यहीं स्वर्ग

और नर्क यहीं |

आशा

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 17-06-2021को चर्चा – 4,098 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात
    मेरी रचना की सूचना के लिए आभार दिलबाग जी |

    जवाब देंहटाएं
  3. मन चंगा तो कठौती में गंगा ! सच है ! जब आपका मन निष्पाप होगा तो आपका जीवन भी सुन्दर होगा और परिणाम भी सुखद होंगे !

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: