29 जुलाई, 2021

लम्हे


                                           भूल  तुमने  न की  थी

शायद यही लिखा था प्रारब्ध में

किसी ने की थी  बुराई

 तुम्हारे नाम आई  |

जीवन में कई पल आते  

अनजाने में होते  ऐसे  

करता कोई कुछ है

भरता कोई और है |

मन पर सीधा प्रहार होता  

शब्दों के विष बुझे बाणों का

तब  कोई साथ नहीं देता

 खुद ही सहना पड़ता  |

क्या  बच  नहीं सकते प्रपंचों से 

क्यों नहीं ? रहें तटस्थ यदि

चलें निश्प्रह हो कर

दुनिया के छल छिद्र से  दूर|

जितनी सावधानी से

सतर्क हो कदम फूँक कर रखोगे

दुनिया के पंक से दूर रहोगे

 समय की कीमत समझोगे |

आशा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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