07 जुलाई, 2021

सुकून दिल का


सुहानी रात ही में

वह  खोजाता

 सुकून ह्रदय  का    

जब  देखता

आसमान का  चाँद

रहा चमक    

पूर्णिमा की चांदनी

चमकाती है

  हर कण धरा का

आधी रात  में

जब सभी सोजाते

वह आनंद लेता  

चाँद की  किरणों का

 चन्द्र किरणे

अटखेलियाँ करतीं  

केशों की लटें

चूमलेतीं आनन

 खेल  प्रिय था

दिल की धड़कन

बढ़ने लगीं

चन्द्र  किरणें लौटीं  |  

आशा

  

8 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार (09-07-2021) को "सावन की है छटा निराली" (चर्चा अंक- 4120) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद सहित।

    "मीना भारद्वाज"

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  2. वाह ! सुन्दर प्रस्तुति ! बहुत खूब !

    जवाब देंहटाएं

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