02 जुलाई, 2021

आगमन सावन का


 

सावन गीत में मधुर संगीत

ऊपर से ढोलक की थाप

खूबसूरत समा का एहसास कराती

 कजरी मन को भाती |

हरियाली चहु ओर धरा पर 

सावन आगमन  की उपस्थिती 

धरती की सौंधी महक से 

 वर्षा के मौसम में  वायु के झोंकों से |

यही सुगंध हमें खींच कर ले जाती

हरेभरे बागों के बीच 

रंग बिरंगे पुष्प सजे  डालियों पर 

कोई क्यारी भी रिक्त नहीं 

 है कमाल माली की मेहनत का |

उसका रिश्ता हैवृक्षों से 

 पिता और पुत्र जैसा

जब कोई वृक्षों से छेड़छाड़ करता

उससे सहा न जाता

 कटु शब्दों से  उसे बरजता |

पक्षी मोर पपीहा  गाते अपनी धुन में 

 चुहल करते एक डाल से दूसरी पर जाते

रंगबिरंगी तितलियाँ उड़तीं

 भ्रमर करते गुंजन  कभी  पुष्प में छिप जाते | 

 बालाओं ने डाले झूले नीम की डाली पर

ऊंची पैंग बढ़ातीं कजरी गातीं

धानी धानी वस्त्र पहन कर

व्योम को छूना चाहतीं |

आशा 


व्योम को छूना चाहतीं |

10 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार(4-7-21) को "बच्चों की ऊंगली थामें, कल्पनालोक ले चलें" (चर्चा अंक- 4115) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  2. सहज, सरल शब्दों में अच्छी रचना!--ब्रजेंद्रनाथ

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह वाह ! सावन का बहुत ही सुन्दर मनभावन शब्द चित्र ! अति सुन्दर !

    जवाब देंहटाएं
  4. सुप्रभात
    धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

    जवाब देंहटाएं

Your reply here: