30 नवंबर, 2021

कान्हां संग नेह लगाया

 


कान्हां संग नेह लगाया

वह कान्हां सी हो गई

ना मीरा बनी न जोगन

ना ही सिद्ध हस्ती हुई |

सारा जग त्याग दिया

माया मोह छोड़ दिया  

ममता न की किसी से

निर्मोही हो कर रह गई |

 दुनियादारी से हुई दूर  

आध्यात्म की ओर झुकी

झुकती ही गई फिर भी 

शान्ति को न खोज सकी |

कान्हां मय होती गई 

दिन रात ध्यान में लीन हुई

अब मन की बेचैनी दूर हुई

वह कान्हां में खो गई |

आशा  

 

 

10 टिप्‍पणियां:

  1. सच्ची भक्ति में बड़ी शक्ति है

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    1. सुप्रभात
      धन्यवाद अनीता जी टिप्पणी के लिए |

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  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (01-12-2021) को चर्चा मंच          "दम है तो चर्चा करा के देखो"    (चर्चा अंक-4265)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार करचर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'   

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    1. सुप्रभात
      आभार शास्त्री जी मेरी रचना को चर्चा मंच में आज शामिल करने के लिए |

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  3. कान्हा की तो बात ही निराली है। बहुत सुंदर।

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    1. सुप्रभात
      धन्यवाद नितीश जी टिप्पणी के लिए |

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  4. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति !

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  5. सुप्रभात
    धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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