17 जनवरी, 2022

सीमा पर तैनात

 



 हो सीमा पर तैनात 

तुम हो कर्तव्य पथ पर अग्रसर

सारी श्रद्धा से जुड़े

कर्म से निष्काम भाव से |

हो तैनात सीमा पर

हो समर्पित पूर्ण रूप से

अपने कार्य के प्रति

है यही प्रिय मुझे |

मुझे गर्व होता जब तुम

जीत को प्राप्त करते हो

पूरे मनोयोग से

प्राथमिकता  देकर उसे |

कोई शब्द नहीं मिलते

तुम्हारी दृढ इच्छा शक्ति के 

दिल से  वर्णन  के लिए

जब भी कोई कार्य हो

तुम्हारी सफलता के लिए |

 जो कार्य तुम्हें सौपा जाए

करते हो पूरी शिद्दत से

हो कर्तव्य प्रथम के अनुयाई

यही तत्परता मुझे भाई |

हमें गर्व है तुम्हारी सोच पर

तुमने सच्चा न्याय किया है

अपने चुने व्यवसाय से

कर्तव्य के प्रति निष्ठा रखने में |

दिल से नमन करते हैं

तुम्हें और तुम्हारी जननी को

तुमसे यही अपेक्षा रही

अपने कर्तव्य के प्रति |

आशा 

11 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. सुप्रभात
      धन्यवाद आलोक जी टिप्पणी के लिए |

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  2. बहुत बढ़िया ! देश के वीर सेनानियों को ह्रदय से नमन ! वो सीमा पर तैनात हैं तो हम अपने घरों में सुरक्षित तीज त्यौहार मना रहे हैं ! जय हिन्द जय हिन्द की सेना !

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  3. सुप्रभात
    धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (19-01-2022) को चर्चा मंच     "कोहरे की अब दादागीरी"  (चर्चा अंक-4314)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'   

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. सुंदर कविता। जय हिन्द।

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  6. हमें गर्व है तुम्हारी सोच पर

    तुमने सच्चा न्याय किया है

    अपने चुने व्यवसाय से

    कर्तव्य के प्रति निष्ठा रखने में |
    दिल से नमन करते हैं
    तुम्हें और तुम्हारी जननी को
    तुमसे यही अपेक्षा रही
    अपने कर्तव्य के प्रति |
    बहुत ही खूबसूरत रचना!
    आभार ..🙏
    मैम आपने मुझे की जगह मुझ लिख रखा है यहाँ पर 👇
    मुझ गर्व होता जब तुम..

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