15 मार्च, 2022

सम्मान


सम्मान मिले न मिले

 अपना कर्तव्य है प्यारा मुझे

यदि न्याय अपने कर्तव्य से न किया

मेरा मन संतप्त हो जाएगा |

परोपकारी जीवन जीने का था

 अरमां रहा बचपन से ही मुझे

अब भी है और भविष्य में  भी रहेगा

मैं अपना कर्तव्य निभाती हूँ |

पूरी शिद्दत से समर्पान भाव से

सम्मान नहीं चाहती बदले में

अपार संतुष्टि मुझको मिलाती है

कोई एहसान नहीं करती किसी पर |

प्राथमिकता देती हूँ अपने कर्तव्य को

नहीं है  दुष्कर जो मेरे लिए

कुछ तो नियंत्रण रखना पड़ता है

अपनी बुद्धि पर विचारों पर |

आशा

 



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2 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक चिंतन ! अपने कर्तव्यों का जिसे ध्यान हो वह सदैव सुखी और संतुष्ट तो रहता ही है सम्मान भी पाता है !

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  2. धन्यवाद साधना टिप्पणी के लिए |

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