28 मई, 2022

सम्मान मिले न मिले



कभी भूल कर भी

 न जाना उस ओर

जहां नहीं मिलता सम्मान

यह भी जान लो |

सम्मान माँगा नहीं जाता

स्वयं के गुण ही उसे पा लेते  

वे जहां से गुजरते

 वह बिछ बिछ जाते |

मन को अपार प्रसन्नता होती

जब बिना मांगे 

चाहा गया मिल जाता

समाज में सर उन्नत होता |

यही प्रतिष्ठा की अभिलाषा रहती

आत्म सम्मान ही धरोहर होती

या यूं कहें संचित धन राशि होती

जिसके लिए रहना दूर  पड़ता

 गलत आचरण से  |

आशा 


आशा 

9 टिप्‍पणियां:

  1. ज्ञानवर्धक कविता

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  2. सार्थक चिंतन ! बहुत सुन्दर रचना !

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  3. बहुत बढ़ियां, बिल्कुल सही

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  4. 'बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख' -सच ही कहा गया है। आत्म सम्मान के बिना सब व्यर्थ है। सुन्दर रचना

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