19 सितंबर, 2022

सरस्वती वन्दना


 

 

                                                        हे वीणा वादिनी स्वर की देवी

मधुर तुम्हारी वीणा का स्वर 

सुनकर  पहुंची तुम्हारे दर  पर 

पाँव पकड़ वंदन किया |

मुझे मालूम है तुम हो  ज्ञान की देवी

थोड़ा  ज्ञान मुझे भी  दे दो 

इतना उपकार करो मुझ पर

मेरा बेड़ा पार लगादो  |

करो भव सागर के पार  

मैंने पूजा की है मनसे

बस एक वर ही माँगा तुमसे

हो तुम विद्द्या की देवी ज्ञान दो |

अज्ञान से दूरी हो मेरी

यही चाह है मेरी

 मेरा बेड़ा पार करो 

बीच भवर में नैया  मेरी

किसी का संबल नहीं मुझको |

जब बेड़ा होगा पार मेरा

नैया पहुंचेगी उस पार 

होगा जय जय कार तुम्हारा

करो उपकार यही मेरा |

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