19 दिसंबर, 2022

कर्मों का फल


 

 

  अपने  करते गैरों सा व्यबहार

 गैर का होता मनभावन  प्यार 

यह तो पता नहीं चलता

कौन अपना कौन पराया |

मन यही सोचता रहता

जो दिखावा होता

 उसे कैसे पहचाने

कहाँ से वह दृष्टि लाए

जो देखते ही जान ले

किसी के मन में क्या है |

मन में किसी के

 क्या पक रहा है

क्या खिलाड़ी पक रही है

अभी पूरी बनी या नहीं  |

इंसान कुछ नहीं करता

यही सब ईश्वर कराता

वह भावनाओं में बहता जाता

उसी के इशारे पर |

क्या यह   पूर्व जन्म के 

कर्मों का फल होता 

या इसी जन्म का अनजाने में 

कुछ कहा नहीं जा सकता |

आशा सक्सेना 

 

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