23 दिसंबर, 2022

केवल अपेक्षा तुमसे


                                          कैसे तुम्हारा बोझ उतारती 

उसके कारण चल न पाती 

है ही भारी इतना हुए पैर भारी 

 बोझ है ही ऐसा किसी से बांटना न चाहा |

अचानक कहाँ से ऊर्जा आई

 मेरे अन्तस  में समाई 

मैंने कार्य पूर्ण करने की ठानी 

बढ़ने लगी आगे

 काँटे से भरे कच्चे मार्ग पर 

कोई की बैसाखी नही चाही 

इतनी क्षमता रही मुझ में 

केवल तुम्हारे सिवाय कोई मेरा नहीं 

रही यही धारणा मन में मेरे 

केवल  तुम मेरे हो 

है पूरा अधिकार तुम पर 

और कोई नहीं चाहती

है केवल अपेक्षा तुम से  |

आशा सक्सेना 



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