23 दिसंबर, 2022

कान्हां क्यूँ न आए

 


बिना बांसुरी ये सुर कैसे सुनाई देते 

कान्हां तो नहीं आए 

पर संदेश ले ऊधव आए  

कान्हां जा बसे मथुरा नगर में |

सुध बिसराई हम सब की

भूले से याद न आई

हम मन ही मन  दुखी हुए  

पलकें  न झपकी पल भर को | 

रो रो पागल हुए उसकी याद में 

अपनी व्यथा किससे व्यक्त करें

कोई समझ न पाया हम को 

हमारा प्यार है कैसा कोई जान न पाया 

 कान्हां बिन रहा न जाए

माखन मिश्री किसे खिलाएं 

हम कान्हां में  खोए ऐसे

 अपने को ही भूल गए  |

कैसा घर द्वार कैसा काम काज 

कहीं मन नहीं लगता

दौड़ा जाता कदम के नीचे कुंजों में 

 या यमुना तीर  |

सुनी जहां मीठी धुन मुरली की 

ऊधव का ज्ञान भी समझ न पाए

है यही समस्या मन की

 कान्हां क्यूँ न आए  |

आशा सक्सेना 



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