02 जनवरी, 2023

कविता लेखन बहुत दुरूह

 


 कविता के कई रूप

 बदल बदल  कर आते

 कोशिश की कुछ नया सीखने की 

रही सदा असफल |

बार बार की कोशिशें जबअसफल रहीं 

मन को संताप हुआ

फिर भी सीखना न छोड़ा 

लगी रही सीखने में |

कोई लाभ न हुआ

 असफलता के सिवाय

 सारी कोशिश  व्यर्थ हुई 

नया सीखने की कोशिश 

 न करने की कसम खाई |

मन बड़ा संतप्त हुआ अपने को अक्षम पा 

 ठन्डे दिमाग से जब  सोचा 

 सिखाने वाले का  कोई दोष न दिखा 

मान लिया  कोई नई बात अपनाने की

 अब सामर्थ्य नहीं  मुझ में  |

फिर भी  लिखने का भूत 

उतरा नहीं सर से 

जब लिखती तब कोई थकान नहीं होती

 नाही कोई  कष्ट  होता |

 व्यस्त रहने में एक अपूर्व आनन्द  आता 

कुछ नया लिखने की कोशिश में 

 जब सफल हो जाती हूँ 

 सफलता को  नजदीक पा कर 

 कुछ और नया   लिखना चाहती हूँ |

आशा सक्सेना 



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