18 अप्रैल, 2023

कैसे तुम को याद करू मैं


                                                            तूम को कैसे  याद करू मै

तुम तो कभी मेरी सुनते ही नहीं

जितनी बार की प्रतीक्षा तुम्हारी

कभी आशीष तक ना  दिया तुमने |

मेर्रे मन को ठेस लगी है

तुमने मुझे अपना समझा ही नहीं

मैंने सबसे अलग तुम्हें माना

सब से विशिष्ट जाना तुम्हें |

तुम्हें ही भजा स्तुति की मैंने

सोच लिया तुम ही हो मेरे

जब भी घंटी मंदिर की बजती

मैं दौड़ी चली आती ,पैर नहीं रुकते मेरे |

तुम राधा के श्याम मीरा के घनश्याम 

मैने तुम से स्नेह लिया है

अपना सब अर्पण किया है

अपना अधिकार नहीं बाटूंगी

 श्याम तुम मेरे हो  मैं हूँ तुम्हारी |

 आत्मिक प्यार है मुझे तुमसे 

 मेरी भक्ती की लाज रखना  

                      सदा साथ रहना मेरे हूँ आश्रित तुम्हारी श्याम

हूँ मैं भक्त तुम्हारी पूरे दिल से |

मेरी जगह और कोई ले

नहीं यह मंजूर मुझे 

                                निगहबानी रखना मेरी |

आशा सक्सेना 

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