04 अप्रैल, 2023

किसी के प्यार को कैसे समझे

 

किसी से क्या चाहिए जब

अपनों ने  ही साथ ना  दिया हो

कभी दो शब्द अपनेपन के

सुनने को कान तरसे |

हम तो घर से दूर रहे

किसी से ना की अपेक्षा कोई

अपने में सक्षम रहे

जीवन भरा कठिनाइयों से

सुख के पल देखे जरा से |

डेरा डाला दुःख ने

 बड़ी उलझने आईं

 एक बात समझ में आई

सुख के सब साथी होते

दुख में  कोई नही होता अपना |

अब घबराने से क्या लाभ होगा

जब अकेले ही जीवन भर रहना है

जब तक रहा साथ तुम्हारा

जीवन में विविध रंग रहे

कभी किसी अभाव का

हुआ ना एहसास |

जीवन है कितना

किसी ने बताया नहीं

कब सांस बंद हो जाएगी

 किसी को पता नहीं

सांस रुकने के पहले

शेष काम करना हैं

 कोई कार्य अधूरा ना रहे

 यही सोचना है |

उन्मुक्त जीवन जिया है अब तक

बंधन नहीं चाहिए कोई

 और यही है प्रार्थना प्रभू से |

आशा सक्सेना          

 


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