03 अक्तूबर, 2015

नानी


थकी हारी नानी  बेचारी
टेक टेक  लाठी   चलती थी
राह में ही रुक जाती थी
बार बार थक जाती थी  
नन्हां नाती साथ होता
ऊँगली उसकी थामें रहता
व्यस्त सड़क पर जाने न देता
बहुत ध्यान  उसका रखता
था बहुत ही भोलाभाला
नन्हां सा प्यारा प्यारा
रोज एक कहानी सुनता
तभी स्वागत  निंदिया का  करता
रात जब गहराती
तभी नींद उसको आती
स्वप्न में भी नानी की यादें
कहानियों की सौगातें
अपने मित्रों में बांटता
नानी को बहुत याद करता
जब बाहर जाना पड़ता
मन साथ न देता उसका
अवसर पाते ही आ जाता
बचपन अपना भूल न पाता
अपने बच्चों में वही लगाव
जब न पाता सोचता 
आखिर कहाँ कमी रह गई
 उन्हें बड़ा करने में
परिवार से जुड़ न पाए
 अपने अपने में खोये रहे
पाया भौतिक सुख संसाधन
पर प्यार से वंचित रहे
 लगती बचपन की यादें
आधी अधूरी 
 नानी दादी बिना
धन धान्य ही मिल पाया
पर न मिला 
प्यार दुलार का साया
आशा

30 सितंबर, 2015

तुझे खोजें कहाँ


अस्ताचल को जाता सूरज के लिए चित्र परिणाम
जाने क्या बात हुई
उदासी ने ली अंगड़ाई
सबब क्या था
उसके आने का
वह राज क्या था
मन की बेचैनी का
 खोज न पाई
चर्चे तेरे  अक्सर
 हुआ करते थे
कभी कम कभी बेशुमार
 हुआ करते थे
ऐसा तो कुछ भी न था
जो चोटिल कर जाता
मन को ठेस पहुंचाता
तब भी मुठ्ठी भर खुशी
दामन में समेत न पाई
अस्ताचल को जाता सूरज
जब खोता  प्रखरता अपनी
थका हारा बेचारा
पीतल की थाली सा दीखता
 बादलों में मुंह छिपाता
आसमान सुनहरा हो जाता
जाने क्या क्या याद दिलाता
उदासी शाम के धुधलके सी
गहराई मन पर छाई  
रंग उसका फीका न होता  
पुरानी किताब के पन्नों सा
छूते ही बिखरने लगता  
 कैसे समेटें  उन लम्हों को
दिल पर लिखे गए शब्दों को
ऐ मुठ्ठी भर खुशी
तुझे कहाँ खोजा जाए
परहेज़ उदासी से हो पाए |
आशा

29 सितंबर, 2015

शिक्षा का महत्त्व


शिक्षा बेटी की  :-
नन्हीं कली नाजों में पली
दिन रात विहसती रहती थी
चिंता चिता समान जान
उससे दूरी रखती थी |
पहले दिन शाला गई
कक्षा में प्रवेश किया
बोझ  बस्ते का था भारी
थकित चकित वह बैठ गई |
पाठ बड़ा ही कठिन लगा
अवधान केन्द्रित ना हो पाया
जाने कब होगी छुट्टी
उसने सोचा कहाँ आ गई |
समस्त  आजादी गई
उबाऊ पठन  पाठन से 
भागने का मन होता
शाला जाने का मन न होता |
एक दिन अचानक
जाने कहाँ  से पत्र आया
जब पढ़ न पाई
अपनी गलती पर पछताई |
यदि कहना मानती
आज यह गति ना होती
ध्यान से पढ़ने लगी
ऎसी उसे लगन लगी |
छिपी प्रतिभा समक्ष आई 
मिला सहयोग भी  यथोचित
एक दिन वही बेटी 
उच्च पदासीन हुई 
माँ पिता की शान हुई |
उसने अपनी  क्षमता को पहचाना   
थी सब के मुंह पर एक ही बात
बेटी हो तो ऎसी हो
शिक्षा का महत्व जानती हो

आशा