25 दिसंबर, 2011

सांता क्लाज


हे सांता हो तुम कौन
कहाँ से आए
बच्चों से तुम्हारा कैसा नाता
वे पूरे वर्ष राह देखते
मिलने को उत्सुक रहते |
क्या नया उपहार लाये
झोली में झांकना चाहते
बहुत प्रेम उनसे करते हो
वर्ष में बस एक ही बार
आने का सबब क्यूं न बताते |
बहुत कुछ दिया तुमने
प्यार दुलार और उपहार
सभी कुछ ला दिया तुमने
सन्देश प्रेम का दिया तुमंने |
तभी तो हर वर्ष तुम्हारा
इन्तजार सभी करते हैं
आवाज चर्च की घंटी की सुन
खुशी से झूम उठते हैं |
हैप्पी क्रिसमस ,मैरी क्रिसमस
बोल गले मिलते हैं
तुम्हारे आगमन की खुशी में
गाते नाचते झूमते झामते
केक काट खाते मिल बाँट
मन से जश्न खूब मनाते |
आशा





9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रविष्टि कल दिनांक 26-112-2011 के सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

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  2. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. बहुत सुन्दर लिखा है आपने,आशा जी.
    आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
    'हनुमान लीला भाग-२' पर आपका
    स्वागत है.

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  4. सुंदर प्रस्‍तुति।
    क्रिसमस की बधाई.....

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  5. मैरी क्रिसमस
    आपको नववर्ष की ढेरों शुभकामनाएँ ...

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  6. सांता क्लॉज़ का नाम ही मन में अद्भुत उल्लास एवं उत्साह का संचार करता है ! बहुत सुन्दर रचना रची है आज ! क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !

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  7. बहुत खूब ...बढ़िया प्रस्तुति

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