21 फ़रवरी, 2021

चंचल चपला हिरणी जैसी

 


कभी चंचल चपल हिरनी जैसी

दौड़ती फिरती थी  बागानों में

अब उसे  देख  मन में  ईर्षा होती

क्यूँ न मैं ऐसी रही अब |

इतनी जीवन्त न हो पाई

बिस्तर पर पड़े पड़े मैंने

लम्बा  समय काट दिया है 

अब घबराहट होने लगती है |

और कितना समय रहा शेष

कैसे जान पाऊँ कोई मुझे बताए

क्या बीता समय लौट कर आएगा

मुझमें साहस का संचार होगा |

फिर से कब आत्म विश्वास जागेगा

पर शायद यह मेरी कल्पना है

कभी सच न हो पाएगी

जिन्दगी यूं ही गुजर जाएगी |

आशा  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

14 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 22 फरवरी 2021 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आत्मविश्वास और साहस की अनुभूति विचारों में होती है अपनी इच्छाशक्ति में होती है शरीर के किसी अंग विशेष में नहीं ! जब तक आत्मविश्वास है मनुष्य कोई भी जंग जीत सकता है ! निराशावादी रचना !

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  3. सुप्रभात
    साधना टिप्पणी के लिए धन्यवाद |

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  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  5. वक़्त के साथ शरीर की ऊर्जा का क्षय होता है । फिर भी जिजीविषा स्फूर्ति प्रदान करती है । आपके स्वास्थ्य की कामना ।

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