मेरी नई पुस्तक "उड़ान मन की "
सतरहवा काव्य संकलन "का प्रकाशन हो चुका है
उसका कवर पेज आपके समक्ष प्रस्तुत है
सहा सक्सेना
सतरहवा काव्य संकलन "का प्रकाशन हो चुका है
उसका कवर पेज आपके समक्ष प्रस्तुत है
सहा सक्सेना
अवकाश होते ही राह तुम्हारी देखी
दिन काटे ना कटता
रातें गुजरीं करवटें बदल
आशा निराशा में झूलती रही |
मन में शक पैदा हुआ
कहीं छुट्टिया तो नहीं हुई केंसिल तुम्हारी
कोई कार्य विशेष तो आया होगा
तभी तुम ना आ पाए अभी तक |
मैंने मन को समझाया
मुझे आत्मविश्वास पर भरोसा था
पर विश्वास से भी
समझोता कब तक करती |
दरवाजे की आहट हुई
कदम बढे उसे खोलने
जैसे ही तुम को देखा
मैं प्रसन्नता से हुई सराबोर |
खुशी इतनी बढी
कि अश्रुओं का सैलाब
बहने लगा द्रुत गति से
रही बेचैन अब न जाना ||
आशा सक्सेना
उतनी जगह घेरेगी जमीन पर
दायरा समझ का बढ़ेगा |
किसी ने यदि उससे खेला
नाकामयाबी जीवन में हाथ
लगेगी
जिस कार्य में हाथ डालोगे
वह फिसल ही जाएगा हाथों से |
जीवन अंधेरी गलियों में भटकेगा
किसी की सलाह ना चाहेगा तब भी
कभी तो ऐसा लगता है
मेरे जीवन से नियंत्रण हटा है |
कोई नहीं अपना दीखता
तब भी उसी की खोज में
मै खुद भी भटकी
अपने पर दया तक नहीं आई |
चाहती यदि कुछ सीखना
लेना चाहती विनम्रता का साथ
उससे मुंह मोड़ना नहीं चाहती
तभी सफलता मेरे पास आती
धैर्य रखने की आदत सिखाती |
नम्र हुई जब आदत मेरी
यह मेरी समझ आया
मुझे संतोष हो जाता
,यही मुझे प्राप्त होता |
धैर्य ,विनम्रता ,और संतोष
हैं सफल महिलाओं के गहने
सोच समझ कर कार्य करना
है उनमें से एक |
आवश्यकता पड़ने पर सलाह
बुजुर्गों की लेना
उन से ही सफलता मिलेगी
जीवन सफल होगा संतोष मिलेगा |
आशा सक्सेना
जब कदम उठाए थे
विशिष्ट कार्य करने के लिए
कभी जल्दबाजी का नाम
ना था मेरे पास |
पर जांच कैसे हुई अनुभव की
मैंने कभी ध्यान ना दिया
मैं अपने आप में व्यस्त रही
किसी से कोई सलाह ना ली |
शायद यही गलती की मैंने
कितना कब किस ने कहा
मन को ठेस लगी मेरे
जब रोका टोकी किसी ने की |
यही मेरे मन में आया
दिन रात आत्म मंथन किया
फिर भी सोचा कहाँ गलत किया मैंने |
यूँ तो बहुत सोच कर ही कदम उठाए
कभी जल्दबाजी का नाम ना था मेरे पास
जांच कैसे हुई कार्य क्षमता की
ध्यान ना दिया किसी ने |
मैं अपने आप में व्यस्त रही
किसी से कोई सलाह ना ली मैंने
शायद यही गलती की मैंने
किसी का ज्ञान देखा ना जाना |
जानने की कोशिश भी ना की
किसी के अनुभवों का लाभ उठाना चाहिए
किसी डिग्री का मोहताज होना नहीं चाहिए
जिससे अनुभाव का पूरा लाभ लिया जा सके
उम्र का बढ़ना जरूरी नहीं
वह सभी कार्य करने में सक्षम हो
उसे महारत हांसिल हो किसी कार्य विशेष में |
दिल पर नियंत्रण रखा
फिर उस कार्य को सीखा
सही अनुभव से सीखने का
आनंद ही कुछ और है |
सफलता के पायदान पर चढ़ कर
बड़ा सुकून मिला मुझ को |
आशा सक्सेना
मैंने कुछ नया किया है
वह भी तुमसे कहे बिना
उसमें मुझे प्रसन्नता मिली है |
उसने नजदीक किया है तुम्हें मेरे
तुमने मुझे अपने आपसे
खुद को इतना पास किया है
मुझे अपने ऊपर गर्व हुआ है |
झूठे गर्व का मुझे एहसास नहीं है
मेराविश्वास इतना बढ़ा है
मुझे ज़रा भी भय नहीं लगता
सही राह खोजने में गंतव्य तक पहुँचने में |
माना कि मैं हूँ सरल सीधी
पर तुम्हारे बिना अधूरी रहती
तुम बिन एक कदम भी
आगे बढ़ा नहीं सकती |
पूर्ण रूप से निर्भर हूँ तुमपर
मैंने तुम्हें अपना मनमींत समझा है
दिन रात स्वप्नों में खोई रहती हूँ
हर समय तुम पर न्योछावर हुई जाती हूँ |
ईश्वर की श्रद्धा अटूट रही मुझ पर
हर समय आशीष रही मेरे सर पर
मन में आशीष प्रभू का सदा रहा मुझ पर
यही क्या कम है कोई गलत काम नहीं हुआ मुझसे |
मुझे तुम पर है अथाह विश्वास
यह तुम ने भी नहीं सोचा होगा
पर मेरी प्रसन्नता पर तुम्हारी प्रसन्नता पर
गर्व है मुझको जैसे |
आशा सकसना
वह खुद ही नहीं जानती
प्यार किसे कहते हैं
अनुभव किया ही नहीं |
जब धर में चर्चा हुई
उसकी शादी की
उसे बड़ा आश्चर्य हुआ
ऎसी भी क्या जल्दी है |
अभी किशोरावस्था बीती ही
नहीं
योवन ने अगड़ाई ना ली
क्या वह भार हुई सब के लिए
या उसका सोच गलत है |
क्यूँ बार बार उसे रोका टोका जाता
यह करो या ना करो
हर बार
कुछ सलाह दी जाती
भाई से कुछ भी नहीं कहा
जाता
क्या कुछ भी मना करने को
कह दिया जाता |
काम ना किया
पहले
बहुत कठिनाई हुई
जब अकेले करना पड़ा सब काम |
दिन भर काम ही काम
क्या यही है इन्साफ मेरे साथ
सुबह से शाम तक रहती व्यस्त
कभी किसी काम से नहीं ना कर
पाती |
किससे करू इनकार
है यही जिम्मेंदारी मेरी
घर की सफाई करू खाना बनाऊँ
या आगत का स्वागत करू |
यदि आलस्य करू
अपने आप को अपराधी समझूं
मुझे भी अच्छा नहीं लगता
कैसे अपने को परिवर्तित
करू|
कोई मुझे समझाओ मै क्या करू
जब भी काम करती हूँ
शरीर साथ नहीं देता
दिनभर के काम से थक
जाती हूँ |
क्या कोई तरकीब नहीं
बहुत थकने से बचने के लिए
अपने पर ध्यान दे पाने के
लिए
हूँ अकेली कैसे बच पाऊँ
घरके कामों की सीमा से |