14 मार्च, 2022

मेरा है अरमान यही


मधुर गीत गाने को संगीत बनाने को

समय की कोई पावंदी नहीं  होती 

पर मैं उलझी उलझी रहती हूँ

 कहीं भटक न जाऊं बेसुरी न हो जाऊं |

हंसी का पात्र बनने का

मुझे कोई शौक नहीं

संगीत हो सुर ताल से परिपूर्ण

शब्दों हो रंगीन यही रुचिकर मुझे |

गीत जब गाऊँ सभी जन सराहें मुझे

मेरे मुंह से स्वर पुष्प  झरें

मन की प्रसन्नता छलके

खुशी चहु ओर दिखे यही है प्रिय मुझे |

जाने कब पूर्णता हांसिल हो पाएगी

मेरे सपनों की दुनिया आबाद हो पाएगी

एक यही अरमान है अधूरा मेरा

कुछ और अधिक की चाह नहीं  मुझे |

करती हूँ अरदास अभ्यास प्रति दिन

प्रभु करलो स्वीकार मुझे दो चरणों में स्थान 

और शीश पर हाथ मेरे जिससे मैं भवसागर से

 तर पाऊँ पाकर तुम्हारा साथ |

आशा 


सायली छंद -३-


 

-तुम

-हो मेरे   

मीत  मन के

भूलना नहीं

कभी |

२-मुझे

रखना सदा

अपनी शरण में

 प्रभु तुम्हें

नमन |

३-जल

 है भरा  

घट छलक रहा

तुम्हारे ठुमके

लगे |

४- कभी

याद करना

उसे देख कर

मुझे भी

निर्भय

-५-पतीली 

मुंह  तक

-दधि से भरी

मुझे प्यारी

लगी

६-जंगल

भरा है 

मूक जीवों से 

अलग नहीं 

हमसे |

७-बंधा 

गहरा बंधन 

कच्ची  डोरी से 

है प्रिय 

मुझे |

आशा 


13 मार्च, 2022

सायली छंद (२)



                                             १- मेरा

तन मन 

महकाती तेरी खुशबू 

बहकाती नहीं 

मुझे |

२-छलकी 

तेरी गागर 

जल से भरी 

सर पर 

धरी |

२- नहीं

चंचल चपल 

आज की नारी 

मेरी सोच

 खरी |

३-हम

हैं हिन्दुस्तानी  

 भारत के  निवासी 

 गर्व  है 

हमें |

४-प्रभू 

तुम ने 

दिया बहुत कुछ 

नहीं सम्हाला 

मैंने |

५-कोई 

 कब तक 

 रक्षा  करेगा  तेरी 

हुई तरुणा 

सक्षम |

६-डाली 

जीवन की 

है हरी भरी 

फूलों से 

लदी |

७-कमल

होकर  अलग 

तैरता पंक पर 

रहा दूर 

उससे |

























इल्जाम


                 इल्जाम
 
मुझे न देना

खामोशी का

सहरा पहन कर |

यही खामोशी

तुम्हें महंगी पड़ेगी

जीवन के

कठिन दौर में | 

दायरा ख्यालों  का

 इतना विस्तृत 

 नहीं है

जिससे हम दौनों में 

दरार पड़ जाए

 मुझे तुम से अलग 

कर पाए |

इल्जाम लगाने 

से पहले 

ज़रा सोचना 

क्या तुम्हें मेरी 

कोई जरूरत 

नहीं है 

मुझे  भी कोई

 दरकार नहीं है |

आशा 

 

11 मार्च, 2022

सायली छंद

 


१-कमतर

नहीं रहा

विकास देश का

नहीं देखा

विगत |

 

२-प्रियतम

 कब आओगे

बताया नहीं है

मुझे तक

तुमने |


 ३-हुई

बगिया सूनी

पुष्पों के बिना  

उड़ गए

भ्रमर |

 

४-आई

 सर्द हवाएं

खुले व्योम से

है सर्दी

बढ़ी|

 

५-- मौसम

 सर्दी का

बड़ा प्रिय मुझे

लगने लगा

मुझे  |

 

६-गाया

फाग आज

होली आई है

लिए रंग

संग |

 

 ७- यहीं  

दुनिया में

है माया मोह

किससे कहें 

सत्य 


८-रिश्ता 

तेरा मेरा 

जन्म जन्मान्तर का 

नहीं सतही 

लगता |



आशा


10 मार्च, 2022

प्रतीक्षा हुई समाप्त

 


प्रतीक्षा अब हुई समाप्त

जब तुम यहाँ आईं

और मैं  तुमसे मिल पाई

कुछ तो कोरोना का भय और बंदिश

कुछ व्यस्तता घर गृहस्थी की रही |

जब प्रतिबन्ध लगाए जाते थे

या खुद ही लग जाते थे अकारण

पर क्या करते पालन की मजबूरी थी

पर मिलना भी था आवश्यक  |

आज तमन्ना पूर्ण हुई अब

जब लंबित प्रकरण पर ध्यान दिया  

जब तक घर न पहुँँची

 मन में दुविधा बनी रही |

देखते ही हुई प्रसन्नता इतनी कि

शब्द कम पड़े इसे व्यक्त करने को  

बहुत समय बाद मिले हों जैसे

इसका आकलन न किया जा सकता हो जैसे |

जाने कितनी बातें मन में हैं कहने को

पर शब्द नहीं मिलते स्पष्ट करने को

इतने से समय की छुट्टी मिली है

मन को संतुष्टि कैसे मिलेगी |

जीवन में समझौता करना पड़ता है

किससे उलझें क्या तर्क रखेंं

विधि का है विधान ऐसा ही  

थोड़े से संतुष्ट होना पड़ता है |

पहले बहुत व्यस्त थे हालातों से थे लाचार

समय नहीं मिल पाया उलझनों में फंसे थे

अब खुद कहीं नहीं जा आ पाते

फिर किसी से क्या रखें अपेक्षा  |

आशा

\

09 मार्च, 2022

वह और तुम


 

उसके ख्यालों में आना

आँख मिचौली खेलते रहना 

जज्बातों से उसके खेलना 

तुम्हें शोभा नहीं देता |

अपने पर रखो नियंत्रण 

किसी को दो न अवसर 

उंगलियां  उठाने का

कुछ अनर्गल बोलने का |

यह  अधिकार भी

तुम खो चुके हो

अपनी मनमानी करके

अकारण उससे उलझ के |

वह कोई गूंगी गुडिया नहीं

जो कभी न बोले 

अपने अधिकार जानती है

तुम्हें पहचानती है |

जितनी दूरी बना कर चलोगे

खुद पर नियंत्रण रखोगे

तभी उसे पाने में सफल रहोगे

यही एक  तरकीब उसे

तुम तक पहुंचाएगी |

जब वह लौट कर आएगी

एक नए रूप में होगी

जिसे दिल से अपनाना

पर हमें तब  भूल न जाना |

आशा

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