16 अप्रैल, 2023

काला कागा और काली कोयल


 बैठता 
काला कागला 
घर की दीवार पर 

वह कांव कांव करता सूचना देता

किसी महमान के  आने की  |

ऎसी ही कोयल होती काली 

 पर मीठी तान सुनाती 

सब का मन मोह लेती

 पर बैठती उसी डाली पर

जहां उसका घोंसला होता |

 जब चूजे होने वाले होते

कागा के घोंसले पर कब्जा करती

कोयल चालाक कागा से अधिक

बच्चे उसके भी पल जाते

कागा के बच्चों के संग |

कागा जान ना पाता

चालाकी कोयल की

जब उड़ने जैसे चूजे हो जाते

पंख निकलते ही एक दिन उड़ जाते

घरों दा खाली कर जाते |

कोयल चालाक कागा से अधिक

बच्चे उसके भी पल जाते

कागा के बच्चों के संग |

कागा जान ना पाता चालाकी कोयल की

जब उड़ने जैसे चूजे हो जाते

एक दिन उड़ जाते

घरोंदा खाली कर जाते |

आशा सक्सेना

15 अप्रैल, 2023

किसी ऐतीहासिक स्थल पर जाने की इच्छा

 


धूप का नाम नहीं है

कितना सुहाना है

आज का  मौसम

बाहर जाने का मन होता है|

सबके साथ घूमने फिरने का

जो आनन्द आता है 

मन को प्रेरित करता है

 कहीं दूर जाने का

वहां के वर्णन का  |

 किसी ऐतिहासिक स्थल पर जाए

उसमें छिपी कहानी का आनन्द उठाएं

वहां की सत्य  कहानियां सुन कर

 जानकारी हांसिल कर कुछ लिखें |

जो कुछ लिखा जाता है

बहुत रोचक होता है 

ऐसा करने से जानकारी

मन में सिमट कर रह जाती है|

 बरसों बरस याद रहती है

बहुत उपयोगी होती है 

यही जानकारी बच्चों को

बहलाने के काम आती है|

उनकी योग्यता में बृद्धि होती है

किसी और  को सुनाते है 

बहुत प्रशंसा  होती है उनकी 

जब वे अपनी कहानी ले कर बैठ जाते हैं|

जब कहानी में वे व्यस्त होजाते है

उनके मुंह से कहानी सुनना 

बहुत अच्छ लगता है

जब बच्चों की प्रशंसा होती है |

14 अप्रैल, 2023

है यही उपलब्धि मेरी

 




सुगंध आए ना  आए

मन पर एक तस्वीर आए ना आए  

पर मस्तिष्क  मैं उसकी अभिन्न छवि रहती है

नहीं मालूम जाने क्या क्या कहती है |

मुझे कभी यह भी ना लगा क्या गलत किया मैंने 

अभी तक किसी ने जब कुछ  कहा

मैंने ठीक से समझा

और आसपास सब को  समझाया |

तब ही संतुष्टि हुई मुझ को

मैंने कुछ विशेष नहीं किया है

अपना कर्तव्य ही  किया है |

हम हैं भारत के निवासी

देश के प्रति कोई कर्तव्य है हमारा

जिसे पूर्ण करना है

कभी पीछे नहीं हटाना है

अपने घर की भी अभिलाशा रही मेरे मन में

उसे दूसरा नम्बर दिया है मैंने

बाक़ी सब बाद में करना है  

  यही  उपलब्धि  है मेरी |

आशा सक्सेना

13 अप्रैल, 2023

जाने अनजाने

 





जाने अनजाने आगे बढ़ा

राह को ना पहचाना

कितनी बार राह भूला

ढूंढता रहा मार्ग  मुश्किल से मिला|

पर पक्का ना था 

काम  चल गया

ऊंची सीडियों  पर

कठिनाई आई चढ़ने में 

सफलता तो मिली पर

 कठिनाई से मन को भय हुआ

कितनी बार सोचा भय किस लिए

किसी का साथ होता तो अच्छा होता |

फिर भी दिल को दिलासा दिया

ईश्वर का नाम लिया

चल दिया घंटियो की आवाज़ सुन   कर

आखिर मन पहुंचा अपने आराध्य तक |

अपार प्रसन्नता हुई जब दर्शन किये

पूरे प्रयत्न  के बाद गहन संतुष्टि मिली 

अपनी सफलता पर |

काश कोई सहारा और  होता

 जिससे निर्देश ले पाता

पूर्णता का  एहसास होता

जिसकी चाह थी मन को |

आशा सक्सेना

12 अप्रैल, 2023

मुझे अटल विश्वास है खुद पर


 मुझे अटल विश्वास है खुद पर 

मैं सब कर सकता हूँ 

अपाहिज  हूँ पर इतना  भी नहीं

 कि कुछ ना  कर पाऊँ |

गोपाल जी  पर भरोसा है मेरा

 संबल कोई और सहारा कोई ना  मुझे 

जिस दिन कुछ कर ना पाउंगा 

जीवन की आस ना रहेगी मुझ को |

ईश्वर की साधना  में मन को लगा कर 

                                              खुद को व्यस्त  रखने  का प्रयत्न करूँगा  

मुझे नही  किसी की  आवश्यकता 

अपने पर ही विश्वास  रखूंगा  

  किसी को कुछ ना  कहू गा 

अब  कोई नहीं समस्या  है |

आशा सक्सेना 


11 अप्रैल, 2023

बदलता मौसम



जिस दिन धूप ना निकले  

बड़ा अजीब सा लगता है   

सुबह से ही बादल छाए हैं

                              झिमिर झिमिर जल कब बरसे गा  |                                                        कब  मन को राहत देगा                                       दिन भर धूप ना निकलना

जल बरसाने का इरादा होना

मन को बेचैन करता है |

जब मौसम बरसात का होता

 उमढ घुमड़ कर बादल आते

आपस में टकराते बिजली कड़कड़ाती 

फिर बूंदों का टपकना देखा

 बड़ा ही आनंद आया  |

बे मौसम बरसने से जल के     

फसल  खराब हो जाती  है

 तब मन को बहुत

 चोट लगती है |

दिल सोचता है

 कैसे मौसम सुधरेगा

आए दिन फ़सलों का बिगड़ना देख

मन को बहुत दुःख होता है |

हम कितने दिन प्रकृति के नखरे सहेगे

 उसके बदलते  रंग देखेंगे

कुछ मानव ने संतुलन बर्वाद किया है

कुछ प्रकृति ने की नाइंसाफी है  |

आशा सक्सेना  

 

10 अप्रैल, 2023

हाँ हाँ ना ना की उलझन

 



हाँ हाँ ना ना में कितना समय बीता

तुमने ज़रा भी ध्यान ना  दिया

मैं सोचता रहा यही कि 

 कभी तो हाँ में उत्तर आएगा |

मैंने पूरा  प्रयास किया  है 

निराशा हाथ ना आएगी

है विश्वास मुझे अपने पर

 जो चाहता हूँ मिल जाता है |

 जब भी हार के कगार पर रहूँगा

किसी की सलाह को मान दूँगा 

यह तो जान लिया है

 अवसर नहीं गवाऊंगा |

यदि तुमने जल्दी 

 कोई निर्णय ना  लिया

 पछताती रह जाओगी  

यदि सही चुनाव ना कर पाईं |

मेरे लिए हो तुम विशेष

 यही मैं खुल कर कह ना सका

अधर में लटका रहा

हाँ हाँ ना ना में उलझा रहा  |

मेरे ख्याल से तुम भी हो सही सलाह की हो हक़दार   

 समय बर्बाद करो गी यह ना जानता था

क्यूँ मुझे अटका रखा  है

 तुम्हारे उत्तर की प्रतीक्षा है |

हाँ  ,ना  कब तक करती रहोगी

निष्कर्ष पर ना  पहुँची  यदि

समय हाथों से फिसल जाएगा

 कुछ भी हाथ ना आएगा   |

आशा सक्सेना